Wednesday, April 24, 2019

मोटापाः न महामारी न बीमारी, फिर भी मुसीबत !

राजीव शर्मा
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि मोटापा सारी दुनिया में महामारी की तरह फैल रहा है। उसका यह कथन इसलिए हैरान और परेशान करने वाला है क्योंकि मोटापा अपने आप में कोई बीमारी नहीं। लेकिन कई बीमारियों की जड़ जरूर है। एक बार मोटापे की चपेट में आ जाने के बाद रोगग्रस्त होने के कई रास्ते खुल जाते हैं। पर मोटापे से किसी रोग के पनपने की प्रक्रिया धीमी होती है और हमें इसका अहसास तब होता है जब हम उसके शिकार हो चुके होते हैं .

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मोटापा दुनिया में मौत की चार बड़ी वजहों में से एक है और इसी की वजह से हर साल 30 लाख लोग मौत के गाल में समा जाते हैं। बचपन से लेकर बुढ़ापे तक हर आयु वर्ग पर यह बात लागू होती है कि हम जितना मोटापे से खुद को बचाए रखेंगे, उतने ही ज्यादा समय तक सेहतमंद बने रहेंगे।

मोटापे का सबसे बड़ा कारण है, हमारे भोजन में जरूरत से ज्यादा कैलोरी होना। यदि किसी व्यक्ति को 2,000 कैलोरी की जरूरत है और वह खानपान से 3,000 कैलारी ले रहा है तो उसके शरीर पर वसा की परतें चढ़ती चली जाएंगी। पर अगर वह गैर जरूरी कैलोरी को कसरत या अन्य शारीरिक कार्यों के जरिये खर्च करता रहे तो मोटापे से बचा जा सकता है।

सवाल यह है कि हम हम मोटापा किसे मानें। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने शरीर की ऊंचाई और कमर के घेरे का पता लगाएं और हर छह माह बाद इसकी नापजोख करते रहें। यदि ऐसा कर पाते हैं तो मोटापे के आने से पहले ही हम उसके प्रति सतर्क हो जाएंगे। ऊंचाई और कमर के घेरे को कुछ इस तरह नियत किया जा सकता है -- एक व्यक्ति जिसकी ऊंचाई 6 फुट यानी 72 इंच है तो उसे अपनी कमर की माप 36 इंच से कम रखनी  चाहिए। इसी तरह एक महिला जिसकी ऊंचाई 5 फुट चार इंच है यानी 64 इंच है तो उसे अपनी कमर की माप 32 इंच से कम रखनी चाहिए।

मोटापा कई तरह की बीमारियां पैदा कर सकता है। जैसे मोटापा बढ़ने पर शरीर में सोडियम ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो जाता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है जो दिल की बीमारियों के लिहाज से खतरनाक स्थिति है। इसी तरह मोटापा टाइप-टू डायबिटीज की सबसे बड़ी वजह है। शरीर में वसा की मात्रा अधिक होने पर शरीर इन्सुलिन के प्रति अवरोधी हो जाता है। अधिक वजन से आर्थ्राइटिस की समस्या हो सकती है, क्योंकि इससे जोड़ों पर अधिक वजन पड़ता है। ज्यादा मोटापे की हालत में ब्रेन स्ट्रोक और दिल का दौरा पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

'हावर्ड स्कूल ऑफ़ पब्लिक हैल्थ' में छपी एक स्टडी के अनुसार महानगरों में रहने वालों में से 70 फीसदी से ज्यादा लोग मोटापे का शिकार हैं। दिल्ली महानगर में ही प्राइवेट स्कूलों के 45 फीसदी और सरकारी स्कूलों के 7 फीसदी बच्चे मोटापे से ग्रस्त पाए गए हैं।

मोटापे से बचने या इसे रोकने के लिए डाॅक्टर की सलाह होती है भोजन में वसा और कार्बोहाड्रेट की मात्रा कम रखी जाए और प्रोटीन व रेशेदार चीजों (फल, सब्जियों) की मात्रा बढ़ाई जाए। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधियां बढ़ाई जाएं।

1 comment:

  1. मोटापे का असली इलाज है, खूब सारी चिंताएं पाल लो, सूख के कांटा हो जाओगी। है मंजूर? नहीं तो तोंद फुलाकर घूमो। करता दिक्कत है।

    ReplyDelete